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Pooja Sharma   2018-03-21

सिकलसेल की जांच में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी कर रहा है छत्तीसगढ़

OnlineIndia रायपुर। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में सिकलसेल की जांच में बुधवार को स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में जांच की गई। इसका कंट्रोल रूम महानदी भवन में बनाया जाएगा। इसकी मॉनीटरिंग  प्रदेश भर में जिला स्तर पर बनी टीम कर रही है। जांच के लिए सभी जिले भर में सॉल्यूबिलिटी टेस्ट किट उपलब्ध कराया है।  

आपको बता दें कि 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चों व सभी गर्भवती माताओं की सिकलसेल जांच की जा रही है। जांच में परिणाम पॉजिटिव पाए जाने पर रेफरल सूची के अनुसार इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच के लिए तत्काल भेजा जाएगा। इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच के लिए जिले के नोडल अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। चिकित्सकों से ऑनलाइन रिपोर्ट लेकर दिन में चार बार अलग-अलग समय में रिपोर्ट भेजने की व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2008 से वर्ष 2018 तक कुल 18 लाख 13 हजार 72 लोगों की सिकलसेल जांच की गई, जिसमें 16 लाख 25 हजार 752 निगेट्यूव, 1 लाख 80 हजार 80 सिकलसेल एएस तथा 7221 सिकलसेल एसएस पाए गए। वहीं वर्ष 2017-18 में चिरायु दलों के माध्यम से आंगनबाड़ी केन्द्रों व स्कूलों में 8लाख 6 हजार 499 लोगों की सिकलसेल जांच की जा चुकी है।

मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में 127223 लोगों की सिकलसेल की जांच की गई थी, जिसमें 114752 निगेटिव, 12058 सिकलसेल एएस तथा 413 सिकलसेल के एसएस रोगी पाए गए थे। इसी प्रकार वर्ष 2017 में 161937 लोगों की सिकलसेल जांच की गई। जिसमें 145101 निगेटिव, 16209 सिकलसेल एएस तथा 614 सिकलसेल के एसएस रोगी मिले थे। वहीं वर्ष 2018 में 15843 लोगों की सिकलसेल जांच की गई, जिसमें 14194 निगेट्यूव, 1570 सिकलसेल एएस तथा 73 सिकलसेल के एसएस रोगी मिले।

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