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OnlineIndia   2018-01-30

अब भारत में मिलेगा Wi-Fi से 100 गुना तेज इंटरनेट

OnlineIndia डेस्क। डिजिटल इंडिया का सपना पूरा करना है तो जरूरी है कि भारत में इंटरनेट और कनेक्टिविटी की व्यवस्था बेहतर हो। स्लो इंटरनेट स्पीड और खराब कनेक्टिविटी की वजह से कई परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। वाईफाई के बारे में तो आप जानते ही होंगे, लेकिन क्या आप लाईफाई के बारे में जानते है?

LiFi एक ऐसी तकनीक है जो कनेक्टिविटी के मामले में WiFi से सौ गुना तेजी से काम करता है। दरअसल यह एलईडी बल्ब के सहारे काम करता है। इस तकनीक के तहत आपके घर में लगाया गया एलईडी बल्ब भी हाई स्पीड डेटा ट्रांसमिट करेगा और इसके लिए उसे वाईफाई या ब्रॉडबैंड की जरूरत भी नहीं होगी।

सूत्रों से जानकारी मिली है कि भारत सरकार इस टेक्नॉलॉजी की टेस्टिंग कर रही है, ताकि इसे इस्तेमाल में लाया जा सके। ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में IT मंत्रालय ने LiFI (Light fidelity) को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर टेस्ट किया है। इसमें 10gbps की स्पीड से डेटा ट्रांसमिट करने के लिए एलईडी बल्ब और लाइट स्पेक्ट्रम यूज किया जाता है। इसकी कनेक्टिविटी की रेंज भी वाईफाई की तुलना में ज्यादा है। आम तौर पर वाईफाई के जरिए आप एक कमरे या फिर एक आर्टमेंट को कनेक्ट कर सकते हैं, लेकिन LiFi का रेडियस 1 किलोमीटर तक का है।

एजुकेशन एंड रिसर्च नेटवर्क के डायरेक्टर जनरल नीना पाहुजा ने ET से कहा है कि, 'LiFi का सबसे बड़ा इस्तेमाल आने वाले समय में देश के स्मार्ट सिटीज में किया जा सकेगा। इसका थीम मॉडर्न सिटीज के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स होगा और इसे एलईडी से कनेक्ट किया जा सकेगा'।

इस तकनीक में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए विजिबल लाइट कम्यूनिकेशन (VLC) का यूज किया गया है जिसके जरिए इसकी कनेक्टिविटी स्पीड लैब में 1Gbps दर्ज की गई है, जो आम वाईफाई से 100 गुना ज्यादा है। आपको बता दें 2015 के आखिर में इस तकनीक को पहली बार टेस्टिंग लैब से बाहर प्रयोग किया जहां इसकी कनेक्टिविटी स्पीड 1Gbps टेस्ट की गई। गौरतलब है कि ज्यादातर आम वाईफाई राउटर्स में 100Mbps की कनेक्टिविटी स्पीड होती है।

अगर यह तकनीक शुरू हो जाती है तो इससे लोकल नेटवर्किंग में काफी फायदा होगा। जहां के सबी कंप्यूटर्स लोकल वाईफाई नेटवर्क से कनेक्ट होते हैं।  Estonian कंपनी के सीईओ दीपक सोलंकी ने बताया है कि ' हम कई इंडस्ट्रीज में इस तकनीक की टेस्टिंग के लिए पायलट प्रोजेक्ट चला रहे हैं, ताकि इस वीएलसी तकनीक को यूज किया जा सके'।

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